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मधुमेह , दमा, पथरी, और गर्भावस्था में बहुत फायदेमंद है सहजन

नई दिल्ली ।  सहजन की जड़, छाल, पत्तियों और फलियों के सेवन से कई तरह के रोग दूर हो जाते हैं। इसका सूप स्वास्थ्य के लिए बड़ा गुणकारी होता है। गर्भावस्था में सहजन का सेवन करने से कमजोरी दूर हो जाती है। इसमें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम, कैरोटीन फॉस्फोरस और विटामिन सी पाया जाता है। यदि हम ऐसे गुणकारी पौधे को रोपते हैं तो हमारी आने वाली पीढ़ी इसके सेवन से सेहतमंद रहेगी।

सहजन औषधीय गुणों से भरपूर है। इसकी फली के अचार और चटनी कई बीमारियों से मुक्ति दिलाने में सहायक हैं। यह जिस जमीन पर यह लगाया जाता है, उसके लिए भी लाभप्रद है। दक्षिण भारत में साल भर फली देने वाले पेड़ होते है. इसे सांबर में डाला जाता है। उत्तर भारत में यह साल में एक बार ही फली देता है। सर्दियां जाने के बाद फूलों की सब्जी बना कर खाई जाती है फिर फलियों की सब्जी बनाई जाती है। इसके बाद इसके पेड़ों की छटाई कर दी जाती है।

सहजन वृक्ष किसी भी भूमि पर पनप सकता है और कम देख-रेख की मांग करता है। इसके फूल, फली और टहनियों को अनेक उपयोग में लिया जा सकता है। भोजन के रूप में अत्यंत पौष्टिक है और इसमें औषधीय गुण हैं। इसमें पानी को शुद्ध करने के गुण भी मौजूद हैं। सहजन के बीज से तेल निकाला जाता है और छाल पत्ती, गोंद, जड़ आदि से दवाएं तैयार की जाती हैं। सहजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में है। सहजन में दूध की तुलना में 4 गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है।

इसकी छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग दूर हो जाता है। इसकी पत्ती का काढ़ा पीने से साइटिका, गठिया में शीघ्र लाभ पहुंचता है। मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्द आराम मिलता है। सहजन की जड़ दमा, जलोधर, पथरी, प्लीहा रोग के लिए उपयोगी है।

सहजन के पत्‍ते राइबोफ्लेविन में समृद्ध होने के कारण ब्‍लड शुगर के स्‍तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इस तरह से वह डायबिटीज के लक्षणों का प्रभावी ढंग से इलाज करता है।

हल्‍दी और सहजन के पत्‍ते का मिश्रण विटामिन सी से भरपूर होने के कारण आपकी इम्‍यूनिटी को मजबूत बनाता है और रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है।

आहार फाइबर से भरपूर होने के कारण यह मल को नर्म बनाा है जिससे आंतों से मल आसानी से निकल जाता है और आप कब्‍ज की समस्‍या से बच जाते हैं।

गर्भावस्‍था हर महिला के जीवन का वह समय है जब उसे अपने खानपान पर विशेष ध्‍यान देना होता है, ताकी मां और बच्‍चा दोनों स्‍वस्‍थ रहें। इस समय मां के आहार से बच्‍चे को भी पोषण मिलता है। गर्भवती को लगभग हर शख्स तरह-तरह के उपाय और पौष्ट‍िक खाने की विधि बताता है, लेकिन क्‍या कभी आपको किसी ने गर्भावस्‍था में सहजन यानी ड्रमस्ट‍िक्स खाने के गुणों के बारे में बताया हैं। शायद नहीं आइए हम आपको गर्भावस्‍था में सहजन खाने के फायदों के बारे में बताते हैं।

गर्भावस्था में सहजन खाना बहुत फायदेमंद और बेहद सुरक्षित होता है। इसमें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम, कैरोटीन फॉस्फोरस और विटामिन सी पाया जाता है। अगर आपको सहजन की फली खाने से परहेज है तो आप इसकी पत्तियों को पानी में उबालकर भी प्रयोग में ला सकती हैं। इसकी पत्त‍ियों में भी वह सभी गुण होते हैं जो सहजन की फली में होते हैं। गर्भावस्था में सहजन खाने से सुबह के समय महसूस होने वाली कमजोरी दूर हो जाती है। साथ ही डिलिवरी भी आसान हो जाती है।

गर्भावस्था में डॉक्टर खासतौर पर कैल्शियम के सेवन की सलाह देते हैं, ऐसे में कैल्शियम की गोलियां लेने से बेहतर है आप प्राकृतिक तरीके से कैल्शियम लें। सहजन में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन और विटामिन पाए जाते हैं। जिससे हड्ड‍ियां मजबूत बनती हैं।

– सहजन के सेवन से सर्दी-खांसी, गले की खराश और छाती में बलगम दूर हो जाता है।
– सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो सहजन का इस्तेमाल आपके लिए फायदेमंद रहेगा।
– इसमें पाया जाने वाला विटामिन सी इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।
– पाचन तंत्र को मजबूत करता है। इसमें मौजूद फाइबर्स कब्ज की समस्या नहीं होने देते।
– इसका सूप खून की सफाई करने में भी बड़ा मददगार है।
– डायबिटीज कंट्रोल में भी सहजन का सेवन फायदेमंद होता है।

 

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