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वायु प्रदूषण से भी बढ़ता है शुगर लेवल : डॉ सूर्यकांत

मां के गर्भ में भी बच्चा होता है प्रदूषण का शिकार, हो सकती है मौत

 

प्रयागराज । वायु प्रदूषण मानव जीवन के लिए अत्यंत खतरनाक होता जा रहा है वायु प्रदूषण के चलते मनुष्य के शरीर में अनेक रोगों के साथ साथ प्राकृतिक रूप से बनने वाले इंसुलिन भी बनना बंद हो जाता है और शरीर में शुगर लेवल तेजी से बढ़ने लगता है ।
आज पत्रकारों से बातचीत करते हुए किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर एवं स्वास रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सूर्यकांत त्रिपाठी ने बताया कि प्रदूषण की खतरनाक स्थिति का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह प्रदूषण अब गर्भस्थ शिशु के लिए भी खतरनाक होता जा रहा है प्रदूषित वातावरण में रहने से मां के द्वारा गर्भनाल से होते हुए गर्भस्थ शिशु तक प्रदूषण पहुंच जाता है और बच्चे का विकास तो रुक ही जाता है साथ ही बच्चा गर्भ के अंदर ही अनेक रोगों से पीड़ित हो जाता है और कभी-कभी स्थिति इतनी खतरनाक हो जाती है कि बच्चे की गर्भ में ही मौत भी हो जाती है ।

 

डॉ सूर्यकांत ने कहा कि हमें प्रदूषित वातावरण से बचने का पूरा प्रयास करना चाहिए धूम्रपान ना स्वयं करें ना अपने आसपास किसी को करने दें लकड़ी और कोयले के चूल्हे पर खाना बनाने से बचें और लोगों को भी बचाएं ।
उन्होंने कहा कि यदि कभी किसी प्रदूषित वातावरण से निकल कर जाना हो तो पुरुष चेहरे पर मास्क की जगह गमछा बांधकर निकले और लड़कियां एवं महिलाएं चेहरे पर सूती दुपट्टा बांध है जिससे प्रदूषण से पूरी तरह बचा जा सकता है इतना ही नहीं प्रदूषित वातावरण से लौटने के बाद पानी को उबालकर उस की भाप अवश्य लें जिससे जो भी प्रदूषण आपने फेफड़े के अंदर एकत्र कर लिया है वह पिघल कर निकल जाएगा और आप स्वस्थ रहेंगे
डॉ सूर्यकांत ने कहा कि प्रदूषण से बचने का सबसे आसान तरीका वृक्षारोपण है बड़े वृक्षों में हमें पीपल तथा छोटे वृक्षों में तुलसी का रोपण अवश्य करना चाहिए क्योंकि यह दोनों वृक्ष सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले वृक्ष माने गए हैं ।
उन्होंने कहा कि सांस के गंभीर रोगी अपने साथ यात्रा के दौरान पोर्टेबल गैस सिलेंडर जरूर रखें जैसे यात्रा के दौरान स्थिति गंभीर होने पर प्राण रक्षा की जा सके इतना ही नहीं इनहेलर गैस सिलेंडर भी बनाए जा रहे हैं जो कभी भी सांस रोगियों को अचानक सांस रुकने पर इनहेलर की तरह यूज करने पर डॉक्टर तक पहुंचने का समय दे देते हैं
उन्होंने बताया कि इलाहाबाद में पहली बार इस तरह के होम गैस सिलेंडर का प्रयोग किया जा रहा है जो हरदिया हॉस्पिटल में उपलब्ध है जहां से ना केवल  नए गैस सिलेंडर लिए जा सकते हैं वरन उसको रिफिल भी कराया जा सकता है और यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी ।

बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान से हो रही है फेफड़ों की बीमारी  :  डॉ आशीष टण्डन

पुराने पेड़ों को काटने की जगह रि इमप्लांट कराए सरकार

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रख्यात स्वास रोग विशेषज्ञ डॉ आशीष टंडन ने कहा कि पेड़ों की लगातार हो रही तेजी से कटान के चलते वातावरण में प्रदूषण का लेवल बहुत खतरनाक तरीके से बढ़ रहा है और हमारे फेफड़े लगातार बीमार होते जा रहे हैं और ऑक्सीजन के कमी के चलते हमारी जान को खतरा बढ़ता जा रहा है ।
उन्होंने कहा कि एक पेड़ को तैयार करने में 20 से 25 साल लग जाते हैं और आज हम विकास के नाम पर इस तरह के विशालकाय पेड़ों को लगातार काटे जा रहे हैं जिनकी संख्या प्रतिदिन लगभग 4000 के आस पास होती है चीन को काटने के बाद हम नए पौधे ना तो लगा रहे हैं और ना ही लगाने के बाद तत्काल वह एक विशाल वृक्ष का रूप ले सकते हैं जिसके चलते वायुमंडल नामी गायब होती जा रही है और का परिणाम है कि कोहरा ना पढ़ने के चलते गर्मी जल्द आ रही है इस प्रकार वातावरण में अचानक परिवर्तन से रोगियों के लिए खतरा बहुत तेजी से बढ़ जाता है शरीर में ऑक्सीजन का परसेंटेज बहुत तेजी से गिरने लगता है ।
उन्होंने बताया कि हमारे शरीर में 99% ऑक्सीजन होना चाहिए और 96% ऑक्सीजन हो जाने पर हमारी स्थिति खतरनाक पोजिशन में आ जाती है और 96% से नीचे होने पर संबंधित व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करके ऑक्सीजन देना पड़ता है कभी-कभी उसे अन्य कोई बीमारी ना होने के कारण सिर्फ शरीर में ऑक्सीजन की कमी के चलते लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है जो किसी भी मायने में सही नहीं माना जाता इसलिए अब पोर्टेबल होम गैस सिलेंडर की व्यवस्था की गई है जिससे व्यक्ति को अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं है और होम गैस सिलेंडर में रखकर अपने घर में ही जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन ले सकता है ।
डॉ आशीष टंडन ने सरकार से यह अपेक्षा की है कि विदेशों की तरह अपने यहां भी बड़े पेड़ों को काटने की बजाये रि इम्प्लांट करें जिससे हम प्रदूषण से बचाव कर सकें ।
डॉ आशीष टंडन ने कहा कि हमें अपनी सेहत एवं पर्यावरण को बचाने के लिए अपने हर खुशी के समय चाहे जन्मदिन हो या शादी की वर्षगांठ ऐसे अवसर पर मोमबत्ती जलाने की वजह वृक्षारोपण करें किस से वातावरण शुद्ध हो और पॉल्यूशन विहीन समाज का निर्माण हो ।

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